Skip to main content

covid-19 with a different perspective ( part-1 hindi)



जैसे जैसे कोविड के साथ  समय गुजरता जा रहा है, वैसे वैसे इसने हमें अलग अलग नज़रिये से जीवन को देखने व जीवन जीने के बारें में सिखाया है।


कोविड-19


कोविड-19 महामारी ने  विश्व पर अपना बहुत गहरा प्रभाव छोड़ दिया है, जिसने जीवन जीने के तरीके में असामान्य परिवर्तन ला दिए हैं। जब से मानव समाज विकसित हुआ है उसके बाद से शायद यह सबसे ज्यादा प्रभावशील बीमारी है जिसने लगभग पूरे विश्व को अपने चपेट में ले लिया है, शायद ही किसी ने इससे पहले विचार किया होगा कि एक छोटा सा वायरस पूरे विश्व को नकारात्मक ढंग से प्रभावित कर पायेगा। इस वायरस की वजह से आज पूरा विश्व लॉक डाउन की अवस्था में है। इसने अपने देश के साथ साथ पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।इसकी वजह से लाखों लोगों का रोजगार छिन गया,मध्यम वर्ग आय के व्यक्ति को भी इसने नकारात्मक तरीके से प्रभावित किया है, दैनिक मजदूरी पर अपने परिवार का पालन पोषण करने वालों को भुखमरी के कारण मौत के मुहाने पर ला खड़ा कर दिया है।
 

सकारात्मकता


लेकिन इस लॉक डाउन के कुछ अनदेखे सकारत्मक प्रभाव भी हमारे जीवन पर पड़े हैं। घर पर समय न देने वाले व्यक्ति को घर के और ज्यादा समीप ले आया है, भाग दौड़ भारी ज़िन्दगी से कुछ समय की राहत दी,जिससे व्यक्ति अपने स्वयं के बारे में सोचने के लिए समय मिला है। प्रकृति पर इसका अनचाहा बहुत ज्यादा सकारत्मक प्रभाव देखने को मिला,लोक डाउन के कारण वातावरण लगभग पूर्णतः स्वच्छ हो गया था,नदियों के पानी का रंग भी बदल गया ,शायद ही आज की युवा पीढ़ी ने नदी के इतने साफ पानी का कभी अनुभव किया हो।।

चाहे या ना चाहे इसे हमें अपने जीवन का हिस्सा बनना होगा, हम यह कार्य पहले भी कही बार कर चुके हैं , ऐसे कई घटनाएं पहले भी मनुष्य जीवन में हुई से जिसने पुरानी रीत से चलते मनुष्य जीवन की आदतें बदल है। बस  फ़र्क इतना है कि आज के परिवर्तनों ने हमें तुरंत और अनिवार्य रूप से बदलने को मजबूर कर दिया है, आज भी कई बीमारी हैं जिनकी वैक्सीन आज तक नहीं बनी लेकिन फिर भी मानव ने अपना जीवन उस बीमारी से बचाव के अनुकूल रूप में डाल लिया है। आगे हम कुछ उन्हीं बीमारियों के कारण आये बदलाव के बारे में चर्चा करेंगे ।



पहले ये जानते हैं हमारे देश में कोविड-19 को लेकर क्या माहौल है। और किस प्रकार हम अपने आप को सुरक्षित रख सकते हैं। 


भारत जैसे देश में,गांव के क्षेत्र में अधिकतर और कुछ शहरी व्यक्ति की कोविड को सोच यह है की " कछु न है कोरोना-वोरोना जाए होने होयगो हो जावेगो" ।। कुछ लोग ये भी कहते हैं कि " आनी होगी(म्रत्यु) तो आ जावेगी "। इस सोच के चलते व्यक्ति अपने व दूसरे के बचाव में कोई कदम नहीं उठाता है। ना वह मास्क का प्रयोग करता है ना सामाजिक दूरी का। इस अज्ञानता के चलते यह वायरस हमें किसी भी हद तक नुकसान  पहुंचा सकता ।। इस नियम का पालन न करने की अडिगता के कारण प्रशासन को मज़बूरन शख़्ति दिखानी पड़ती है। जिससे उन्हें कई बार अज्ञानता के कारण जन्मे गुस्से का भी सामना करना पड़ता है। खैर ये भारत देश है यहां व्यक्ति के  जान से ज्यादा परंपराओं का मान हैं। हमें अपनी रूढ़िवादी सोच से बाहर आना होगा।

खैर हम भी  कभी न कभी जरूर बदलेंगे ।।


और हमें बदलना ही होगा अन्यथा यह अभी हुये नुक्सान से ज्यादा क्षति पहुंचा सकता है। जो कि मानव सभ्यता के लिए अहितकर साबित होगा।।

कुछ बीमारी या महामारी जिसने हमारे जीवन में परिवर्तन लाये,हमारी आदतें बदली।। वैसा ही बदलाब हमें अभी अपनाने की जरूरत है।।

                                                                                                        

                                                                                                          भाग-2  
                                                                                                         आगे जारी है........

If you have any query about this post let me know in the comment box below
-Naman Jain

Comments

Unknown said…
Literally supperbb
Unknown said…
Brilliant perspective

Popular posts from this blog

दवाइयों का सामान्य ज्ञान (भाग-2)

दोस्तों, कोरोना महामारी में लॉक डाउन की घोषणा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने हम सबको सलाह दी थी कि इस समय सामान्य बीमारियों के लिए के इलाज के लिए कम से कम अस्पताल जाने की सलाह दी थी,जिससे उन पर पड़ने वाला दबाब कुछ हद तक कम हो सके। उनकी सलाह का अनुसरण करते हुए हमारे कुशल डॉक्टरों ने कुछ बीमारियों के लिए दवाइयों के नाम सुझाये हैं। सामान्य स्थिति में आप इस दवाओं का सेवन कर सकते हैं अगर आप किसी स्पेशल मेडिकल कंडीशन में हैं या आप गर्भवती हैं, तो इन दवाओं के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।। कुछ दवाओं के नाम इस प्रकार हैं।   ◆सर दर्द- vasograin,saridon,disprin  ◆उल्टी - vomikind, reglan  ◆दस्त - Norflox-TZ,Brakke,O2 ◆एलर्जी - cetrazin,CZ3,Avil ◆चक्कर- stementil-MD ◆मंसूडों का दर्द- Flozan-AA+Prednisolone मंसूडों में दर्द अधिक होने पर इन टेबलेट के साथ Dentaforce-DT या ketorol-DT का सेवन कर सकते हैं। ◆एलर्जी से जुक़ाम/ छीकें आना - monticope, milolast-LC ◆कमजोरी/थकान महसूस होने पर- cap. Neurokind gold ,Zincovit, revital ◆छाले होने पर-Antibiotic tablet+ because ◆फंगल इन्फेक्शन होन

दवाइयों का सामान्य ज्ञान।।

आज, कोरोना महामारी की वजह से अस्पतालों पर असामान्य रूप से मरीजों का दबाब बढ़ता जा रहा है, डॉक्टर सामान्य मरीजों को पूर्ण समय देने में असमर्थ हैं तथा हमें भी सामान्य बीमारियों में अस्पताल जाने से बचना चाहिए तथा उन छोटी छोटी बीमारियों के इलाज की जानकारी स्वयं रखना चाहिए, आज में आपके साथ कुछ सामान्य बीमारियों की के ईलाज़ के लिए ली जाने वाली दवाईओ के बारे मे अपना ज्ञान साझा करना चाहता हूं।।   रोग                         --                    दवाई सामान्य बुख़ार          --     पेरासिटामोल सामान्य शारीरिक दर्द--   असक्लोफेनक, निमेसुलीड, डिक्लोफेनेक दर्द+सूजन   -- असक्लोफेनक+serratiopeptidase      "" "".      --Diclofenac +serratiopeptidase पेट दर्द       -- मेफ्टल सपास  ज़ुकाम     -- सिनरेस्ट, सूमो कोल्ड, हैट्रिक-3.. खांसी     - - Tussin-DMR, ambroxil....  ज़ुकाम, खांसी की दवा के साथ एंटीबायोटिक दवा भी ली जा सकती है जो काफी असरदारक साबित होती हैं संक्रमण को रोकने के लिए, कुछ एंटीबायोटिक दवा--- Azithromycin, levofloxaxin ।।।  घुटने का दर्द। -- Glucosamine ।। नोट:-

हिमालयन वियाग्रा

चर्चा में होने का कारण हिमालयन वियाग्रा को IUCN की लाल सूची में असुरक्षित प्रजाति(Vulnerable) का दर्जा दिया गया, बाजार में इस फंगस ,हिमालयन वियाग्रा की  कीमत 20 लाख रुपये प्रति किलो तक है। ■ हिमालयन वियाग्रा - यह फंगस एक प्रकार का परजीवी है जो  अपने विकास के लिए किसी दूसरे जीव पर निर्भर रहता है, दूसरे जीव को यहां caterpillar कहा जाता है जिसके अंदर यह फंगस अपना विकास करता है, यह फंगस चीन,कोरिया में बहुत प्रचलित है जिसका उपयोग कामोत्तेजना में किया जाता है जिसे तकनीकी रूप में Aphrodisiac  कहा जाता है।   इस फंगस का वैज्ञानिक नाम -  Cordyceps fungus- ophiocordyceps sinensis  इस  फंगस को कई अलग अलग नामों से जाना जाता है। ●हिमालयन वियाग्रा ●चीनी कैटरपिलर फंगस ● यरतसा गम्बू ●कीड़ा जड़ी ■यह फंगस का रहवास हिमालयन के पर्वतों पर है, जहाँ की समुद्र तल से ऊंचाई 3000 मीटर से 5000 मीटर हो। यह उत्तराखंड,सिक्किम,नेपाल,,तिब्बत,भूटान,चीन के प्रान्त यूनान में अधिक पायी जाती है। इस फंगस को लैबोरेटरी में नहीं बनाया जा सकता ,यह प्राकृतिक वातावरण में ही मिलती है जहाँ साल के अधिकांश समय बर्फ की चादर और गर्मियों म