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Showing posts from August, 2020

fibre in food and health

फाइबर,हमारे भोजन के पाचन में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।यह हमारे पाचन तंत्र को स्वास्थ्य बनाए रखने का काम करते हैं।हम अपने भोजन में फाइबर युक्त फूड का इस्तेमाल करते हैं तो यह भोजन को अच्छे से पचाने में मदद करता है, भोजन में फाइबर ना होने पर भोजन को पचाने के लिए शरीर को अधिक ऊर्जा लगानी पड़ती है।  कितनी मात्रा लेनी चाहिए  इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन द्वारा पुरुषों को लगभग 38 ग्राम व महिलाओं को लगभग 25 ग्राम डायट्री फाइबर के सेवन की सलाह दी है। सामान्यतः फाइबर दो प्रकार के होते हैं। घुलनशील व अघुलनशील घुलनशील फाइबर -यह पानी में घुल जाते हैं,यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने, कॉलेस्ट्रॉल को कम करते हैं। यह जौ,दलिया,बीन्स, नट्स, फल - सेव बैरी में पाया जाता है। अघुलनशील फाइबर - यह फाइबर पानी में नहीं घुलते हैं।यह भारी होते हैं ये कब्ज को रोकने में मदद करते हैं। यह साबुत अनाज,गेंहू के अनाज,गाजर अजबाइन,टमाटर आदि में पाए जाते हैं। फाइबर का स्वास्थ्य पर प्रभाव। फाइबर का सेवन हमारे स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है, हमारी बीमारियों का सबसे मुख्य कारण पेट का खराब होना भोजन का पूर्ण पाचन

Avoid these habits if you want to live fit and fat free

FAT, मोटापा आज के समय की सबसे ज्यादा गंभीर समस्या बन गई। मोटापा से छुटकारा पाने के लिए हमारे द्वारा तरह तरह के जद्दो जहत किए जाते हैं।लेकिन फिर भी हमारी कुछ आदतों के कारण हमें मोटापा से छुटकारा नहीं मिल पाता है।मोटापा से हमारे अंदर अविश्वास बढ़ता है बल्कि मोटापा हमारे अंदर कई प्रकार की बीमारियों के जन्म का कारण भी होता है। आज हम उन आदतों के बारे में चर्चा करेंगे जिनके कारण हम मोटापे से घिरे रहते हैं। 1-रात में सोने से पहले भोजन करना रात के भोजन व सोने में काम से काम 3 घंटे का अंतर होना चाहिए तथा खाना खाने के बाद टहलना चाहिए जिससे खाना पूर्ण रूप से पच सके। कई बार हम रात में भूख के कारण नहीं बल्कि आदत के कारण खाते हैं। अगर आपको भी यही आदत है तो रात में शक्कर या हाई कैलोरी खाना खाने से बचना चाहिए, देर रात्रि भूख लगने पर फल खा सकते हैं,पर अधिक मात्रा में नहीं। 2-सोने का समय निश्चित होना। सोने का समय बार बार बदलने से शरीर का पाचन चक्र पर असर पड़ता है।जिससे हमारा पेट खराब रहता है। क्यों की कम सोने या सोने का समय बदलने से यह शरीर की केमिस्ट्री से मेल नहीं खाती है। इससे शरीर के हार्मोन की स्थि

Olive oil's benefits(ऑलिव ऑयल के फायदे)

ऑलिव ऑयल(जैतून का तेल) पोषक तत्वों(विटामिन्स,मिनिरल्स) से भरपूर तथा स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक इस तेल को ऑलिव से प्राप्त किया जाता है।  इसका इस्तेमाल कुकिंग,बॉडी मसाज, हेयर ऑयल के तौर पर और भोजन में सलाद को स्वादिष्ट बनाने के लिए ऊपर से डाला जाता है। इस ऑयल की एक और खासियत यह है कि इसमें एंटिग - एजिंग तत्व भी पाए जाते हैं।  ✓इसको सर पर मसाज करने से डैंड्रफ की समस्या से भी छुटकारा मिल जाता है। और हम जानते हैं कि डैंड्रफ बालों की झड़ने का एक मुख्य कारण है। ✓यह विटामिन-ई, विटामिन के, आयरन, ओमेगा-3 व 6 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. ✓ऑलिव ऑयल को बादाम तेल व कैस्टर ऑयल  के साथ मिला कर लगाने से बालों की ग्रोथ तेज़ी से बढ़ती है,तथा बाल काले, घने व चमकदार बनते हैं। ✓रिसर्च से सामने आया है कि ऑलिव ऑयल में हीलिंग प्रॉपर्टीज होती है,जिससे यह हार्ट के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध माना गया है। इसको सेवन से यह पाया गया है कि यह दिल की धमनियों को दुरुस्त करता है। ✓भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सिडेंट गुण होने के कारण इसके इस्तेमाल से फ्री रैडिकल डैमेज से बचाव रहता है। ✓तीस के बाद महिलाओं की बोन

Sanitizer and their's fact

कोरोना के बाद आज के समय का सबसे पॉपुलर शब्द कोई है तो वो है "सैनिटाइजर"  शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ऐसा भी दिन आयेगा जब सैनिटाइजर हमारे   जीवन का अभिन्न हिस्सा बन जायेगा।और यह हमारे जीवन में सामान्य रूप से घुल जायेगा। लेकिन हमें इसके बारे में पूरी तरह जानकारी की कैसे इसका इस्तेमाल करें,कोनसा सैनिटाइजर है बेहतर,कब इसका इस्तेमाल ना करें। सैनिटाइजर एक जहरीली व ज्वलनशील द्रव है। इसका इस्तेमाल सावधानी पूर्वक करना चाहिए। आइए जानते हैं इन सभी बातों को। सैनिटाइजर को लेकर अवधारणा आज कल व्यक्ति हर समय सैनिटाइजर का उपयोग करता है,जरूरत ना होने पर भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।सबसे पहली बात यह जाननी आवश्यक है कि सैनिटाइजर,हैण्ड वाश का विकल्प नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल तब ही करें जब साबुन से हाथ धोने की व्यवस्था ना हो पाए। साबुन अधिक प्रभाव शाली सिद्ध होता है सैनिटाइजर से कुछ विशेष प्रकार के कीटाणु/विषाणु जैसे नोरोवायरस,क्रिप्टोस्पोरिडियम पर असर नहीं होता है।या  केमिकल, भारी धातु भी सैनिटाइजर  से हमारे हाथ से साफ नहीं होते हैं। सैनिटाइजर कभी भी 100% कीटाणुओं/विषाणुओं को नष्ट करने का द

skin disease,cause and cure in hindi(try this treatment)

धन्यवाद साथियों,हमारे द्वारा लाई गई श्रृंखला "दवाइयों का सामान्य ज्ञान" को आपका बहुत सराहना हुई जिसके चलते हमने उस कड़ी को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है आज हम आपके लिए उसका 4 भाग लेकर उपस्थित है।  त्वचा हमारे शरीर का सबसे भाग है जिसकी देखभाल करना आवश्यक है क्योंकि यही है जो कई बाहरी संक्रमण से बचाती हैै इसलिए इसका स्वस्थ्य होना आवश्यक है,आज के समय स्किन समस्याओं से ग्रसित लोगों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिसके चलते हमें इसका रोकथाम के  पता होना चाहिए,और अभी वारिस के मौसम में अक्सर यह देखा गया है लोगों को त्वचा का इन्फेक्शन बहुत अधिक बड़ जाता है जिसमें खुजली सामान्यतः बहुत लोगों की परेशानी का कारण बनती हैै। इस आर्टिकल में आज त्वचा रोगों से सम्बन्धित उपचार तथा बचाव के बारें में खास चर्चा करेंगे। त्वचा रोग होने का कारण सामान्यतः त्वचा रोग रक्त दोष के कारण होते हैं जब हमारे शरीर में विष्कता बढ़ती जाती तो रक्त दोष होने की संभावना भी बढ़ती जाती है। कुछ त्वचा सम्बन्धी रोगों को छोड़ कर(वंशानुगत) अधिकत्तर त्वचा रोगों की वजह स्ट्रैस,लीवर में समस्या,अनुचित प्रकार का भोजन करना

Thyroid disease, treatment in hindi (100% effective result)

बदलते वक्त के साथ लोगों की दिनचर्या खान पान में बहुत अधिक परिवर्तन आ रहा है।आज के व्यक्ति अनुचित प्रकार के भोजन का बहुत अधिक सेवन किए जा रहा है।हमारी थाली में आज के समय सम्पूर्ण आहार की कमी देखी गई है।पूर्ण आहार प्राप्त न होने के कारण अनेक बीमारियों ने हमें घेर लिया है।रोजाना व्यायाम न करना ,अनुचित ठंडा पीना से हमें अनेक रोग घेर लेते हैं। थायरॉइड उनमें से एक हैै आज के समय यह काफी आम बीमारी सी बन गई है।दुनिया की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा इस बीमारी से ग्रस्त है थायरॉइड के करना शरीर में मोटापा या पतलापन,आंखों का बाहर आना,चक्कर आना आदि प्रभाव दिखाते है। इसके लिए  ऐलोपैथिक दवाई का लंबे समय तक सेवन करने से शरीर पर बहुत नकारत्मक प्रभाव पड़ने लगते हैं।इसीलिए जितना संभव हो इसका आयुर्वेदिक उपचार करें  जिससे इसे जड़ से ख़त्म किया जा सके।। थायरॉइड थायरॉइड,हार्मोन्स बनाता हैऔर जो हमारे पूरे शरीर की अलग अलग कार्यप्रणालियों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  थायरॉक्सिन हार्मोन वसा , प्रोटीन  और कार्बोहाइड्रेड  के मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। यह रक्त  में शर्करा,  कोलेस्ट्रॉल  तथा  फास्फोलिपिड  का मात्

TOP TEN FOODS TO BOOST YOUR IMMUNITY

शरीर को स्वस्थ्य बनाये रखने के लिए हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता(IMMUNITY) का मजबूत होना अति आवश्यक है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हमें उन खाद्य पदार्थों का सेवन अवश्य करना चाहिए जो हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाये। कुछ खाद्य पदार्थों के नाम जिनका सेवन कर हम खुद को स्वाथ्य रख सकते हैं। 1.सनफ्लोवर सीड्स(SUNFLOWER SEEDS) शरीर को स्वस्थ रखने में इसका सेवन भी बहुत अधिक लाभकारी सिद्ध होता है। इसके सेवन से शरीर अनेक प्रकार के पोषक तत्वों की कमी को पूरा कर सकता है। जो कि हमें फिट बनाए रखने ,बीमारियों से दूर रखने के लिए उपयोगी है। यह विटामिन ई,विटामिन बी6, फॉस्फोरस,मैग्नेशियम,सेलेनियम,phytosterols,कॉपर का एक बहुत अच्छा सॉर्स है। सेलेनियम सेल्यूअर डीएनए को नष्ट होने से बचाता है। यह इम्यूनिटी को बेहतर रखने का एक अच्छा माध्यम है। 2.पपीता(PAPAYA)- यह विटामिन सी से भरपूर होता है यह शरीर की दैनिक जरूरत का विटामिन सी पूर्ण कर देता है। पपीता में PAPAIN नामक एंजाइम पाया जाता है जो भोजन को पचाने में मदद करता है।इसके साथ इसमें पोटैशियम,विटामिन बी,फोलेट,एन्टी-ऑक्सीडेंट, विटामिन-ए भी प

आयुर्वेद(AYURVED) । आयुर्वेद को जाने और जीवन में अपनाये।

आज के समय में आयुर्वेद की उपयोगिता आज की जीवन शैली में  मानव का रहन-सहन,खान-पान बहुत ही ज्यादा अव्यवस्थित हो गया है,आज के समय हम सभी बिना सोचे समझे हर प्रकार का अनुचित पदार्थों का सेवन किये जा रहें हैं जिसका हमारे स्वास्थ्य पर बहुत ज्यादा नकारत्मक प्रभाव पड़ रहा है। जिसके चलते अपने स्वाथ्य को सामान्य बनाने के लिए हमारी निर्भरता अंग्रेजी(ALLOPATHIC) दवाइयों पर बढ़ती जा रही है और इस बात से भली भाँति परिचित हैं कि लंबे समय तक अंग्रेजी दवाओं के सेवन से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।परन्तु आज का सत्य यह भी है कि जैसे जैसे मानव जीवन शैली में परिवर्तन आ रहा है,वैसे वैसे नई नई बीमारियों का भी जन्म हो रहा है जिसमे साथ कई गम्भीर बीमारियों का जन्म होता जा रहा है इन गंभीर बीमारियों की स्थिति में शीघ्र लाभ पहुंचाने के लिए अंग्रेजी दवाएं ही कारगर साबित हुई हैं।इन दवाओं के सेवन से स्वास्थ्य शीर्घ ठीक हो जाता है। जिससे हमारा विश्वास इन दवाओं पर बढ़ता जा रहा है। फिर भी आप कोशिश करें कि आप अंग्रेजी दवाओं का सेवन अल्पकाल के लिए करें जिससे यह आपके शरीर पर कोई नकारत्मक प्रभाव न डाले।  भारत की देन भारत के