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Avoid these habits if you want to live fit and fat free



FAT, मोटापा आज के समय की सबसे ज्यादा गंभीर समस्या बन गई। मोटापा से छुटकारा पाने के लिए हमारे द्वारा तरह तरह के जद्दो जहत किए जाते हैं।लेकिन फिर भी हमारी कुछ आदतों के कारण हमें मोटापा से छुटकारा नहीं मिल पाता है।मोटापा से हमारे अंदर अविश्वास बढ़ता है बल्कि मोटापा हमारे अंदर कई प्रकार की बीमारियों के जन्म का कारण भी होता है। आज हम उन आदतों के बारे में चर्चा करेंगे जिनके कारण हम मोटापे से घिरे रहते हैं।

1-रात में सोने से पहले भोजन करना

रात के भोजन व सोने में काम से काम 3 घंटे का अंतर होना चाहिए तथा खाना खाने के बाद टहलना चाहिए जिससे खाना पूर्ण रूप से पच सके।
कई बार हम रात में भूख के कारण नहीं बल्कि आदत के कारण खाते हैं। अगर आपको भी यही आदत है तो रात में शक्कर या हाई कैलोरी खाना खाने से बचना चाहिए, देर रात्रि भूख लगने पर फल खा सकते हैं,पर अधिक मात्रा में नहीं।

2-सोने का समय निश्चित होना।

सोने का समय बार बार बदलने से शरीर का पाचन चक्र पर असर पड़ता है।जिससे हमारा पेट खराब रहता है। क्यों की कम सोने या सोने का समय बदलने से यह शरीर की केमिस्ट्री से मेल नहीं खाती है। इससे शरीर के हार्मोन की स्थिति भी असंतुलित हो जाती है।

3- तनाव और चिंता करना।

यह मानव के स्वास्थ्य के सबसे  बड़े दुश्मन होते हैं,यह हमारा वजन बड़ा सकते हैं तथा हमारे जीवन को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। सामान्यतः यह देखा गया है कि जब हम ऐसा महसूस करते है तो हमें भावनात्मक भूख का सामना करते हैं।जिसके कारण हम ज्यादा खा लेते हैं। इसको कम करने के लिए आप पहले फल खा सकते या चाय ले ले।

4-जल्दी जल्दी भोजन करना।

आज की पीढ़ी में धेर्य जैसे शब्द का कोई महत्व नहीं है,आज हम हर काम जल्दबाजी में करना चाहते हैं।भोजन भी जल्दी जल्दी करते जाते हैं।भोजन को पूरा चबाए बिना जल्दी जल्दी भोजन करने से हम जरूरत से ज्यादा भोजन कर लेते हैं।अगर धीरे - धीरे चबाकर भोजन किया जाए तो कम भोजन खा कर भी हम अच्छा महसूस करेंगे जैसे की पेट भर गया है। इसीलिए चबा चबा कर भोजन करना चाहिए।

5-नाश्ता ना करना।

नाश्ता हमारे भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। डाइटीशियन,हैल्थ केयर आज इस बात से सहमत है कि नाश्ता बहुत जरूरी है।यह दोपहर,रात के खाने से भी ज्यादा जरूरी है।
सुबह का खाना हमारे शरीर में मोटाबोलिज्म को बढ़ाता है। यह भोजन हम दिन भर के लिए काम करने की ऊर्जा देता है। अगर  हमारी अच्छी मेटाबॉलिज्म रेट नहीं होगी तो यह असंभव सा है वजन को कम करना। सुबह का नाश्ता प्रोटीन से भरपूर होना चाहिए तथा कार्बोहाइड्रेट भी इसका भाग होना जरूरी है।





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-Naman Jain

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दोस्तों, कोरोना महामारी में लॉक डाउन की घोषणा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने हम सबको सलाह दी थी कि इस समय सामान्य बीमारियों के लिए के इलाज के लिए कम से कम अस्पताल जाने की सलाह दी थी,जिससे उन पर पड़ने वाला दबाब कुछ हद तक कम हो सके। उनकी सलाह का अनुसरण करते हुए हमारे कुशल डॉक्टरों ने कुछ बीमारियों के लिए दवाइयों के नाम सुझाये हैं। सामान्य स्थिति में आप इस दवाओं का सेवन कर सकते हैं अगर आप किसी स्पेशल मेडिकल कंडीशन में हैं या आप गर्भवती हैं, तो इन दवाओं के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।। कुछ दवाओं के नाम इस प्रकार हैं।   ◆सर दर्द- vasograin,saridon,disprin  ◆उल्टी - vomikind, reglan  ◆दस्त - Norflox-TZ,Brakke,O2 ◆एलर्जी - cetrazin,CZ3,Avil ◆चक्कर- stementil-MD ◆मंसूडों का दर्द- Flozan-AA+Prednisolone मंसूडों में दर्द अधिक होने पर इन टेबलेट के साथ Dentaforce-DT या ketorol-DT का सेवन कर सकते हैं। ◆एलर्जी से जुक़ाम/ छीकें आना - monticope, milolast-LC ◆कमजोरी/थकान महसूस होने पर- cap. Neurokind gold ,Zincovit, revital ◆छाले होने पर-Antibiotic tablet+ because ◆फंगल इन्फेक्शन होन

दवाइयों का सामान्य ज्ञान।।

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हिमालयन वियाग्रा

चर्चा में होने का कारण हिमालयन वियाग्रा को IUCN की लाल सूची में असुरक्षित प्रजाति(Vulnerable) का दर्जा दिया गया, बाजार में इस फंगस ,हिमालयन वियाग्रा की  कीमत 20 लाख रुपये प्रति किलो तक है। ■ हिमालयन वियाग्रा - यह फंगस एक प्रकार का परजीवी है जो  अपने विकास के लिए किसी दूसरे जीव पर निर्भर रहता है, दूसरे जीव को यहां caterpillar कहा जाता है जिसके अंदर यह फंगस अपना विकास करता है, यह फंगस चीन,कोरिया में बहुत प्रचलित है जिसका उपयोग कामोत्तेजना में किया जाता है जिसे तकनीकी रूप में Aphrodisiac  कहा जाता है।   इस फंगस का वैज्ञानिक नाम -  Cordyceps fungus- ophiocordyceps sinensis  इस  फंगस को कई अलग अलग नामों से जाना जाता है। ●हिमालयन वियाग्रा ●चीनी कैटरपिलर फंगस ● यरतसा गम्बू ●कीड़ा जड़ी ■यह फंगस का रहवास हिमालयन के पर्वतों पर है, जहाँ की समुद्र तल से ऊंचाई 3000 मीटर से 5000 मीटर हो। यह उत्तराखंड,सिक्किम,नेपाल,,तिब्बत,भूटान,चीन के प्रान्त यूनान में अधिक पायी जाती है। इस फंगस को लैबोरेटरी में नहीं बनाया जा सकता ,यह प्राकृतिक वातावरण में ही मिलती है जहाँ साल के अधिकांश समय बर्फ की चादर और गर्मियों म