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सम्पूर्ण आहार-कैसे रखे खुद को स्वस्थ्य?



भोजन, सम्पूर्ण आहार ना होने पर यह अनेक प्रकार की बीमारियों का कारण बनता हैै। सम्पूर्ण आहार ग्रहण करने से हमारे शरीर को  महत्वपूर्ण प्रकार के पोषक तत्वों की कमी पूर्ण हो जाती है। जिसके चलते हम बीमारियों से सुरक्षित रह पाते है। शरीर में किसी भी प्रकार के पोषक तत्व की कमी अनेक प्रकार की बीमारियों का कारण बनती हैै।
भोजन में विविधता आवश्यक है,जिससे हमें विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व,विटामिन,मिनिरल्स,माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की बराबर मात्रा मिलती रहे।अगर हम एक ही प्रकार का भोजन बार बार करेंगे तो इससे एक प्रकार के पोषक तत्व की अधिकता वी अन्य की कमी देखी जा सकती है।जो कि अपने आप में बहुत नुकसान देह है।
आयुर्वेद व आधुनिक रिसर्च में पाया गया है कि एक प्रकार का भोजन बार बार करने से हमें बीमारियों का सामना करना पड़ता है कई बार यह कैंसर का कारण भी देखा गया है।

शरीर की इम्यूनिटी के कमजोर होने का कारण पोशक तत्वों का पूर्ण रूप में नए मिलना भी होता है।अगर हम शरीर को पूर्ण रूप से पोषित करते रहेंगे तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी अच्छा रख सकेंगे।

भोजन में क्या शामिल करें।

अनाज

अलग अलग प्रकार के अनाजों के सेवन करें। अकसर देखा गया है। उत्तर भारत में अनाज में गेहूं को तथा दक्षिण भारत में चावल का उपभोग भोजन अधिक किया जाता है।रिसर्च में पाया गया है कि यह नुकसान देह साबित होता जा रहा है। इससे हमें केवल एक ही प्रकार के पोषक मिल रहे हैं।जिससे दूसरे पोषक तत्वों की कमी देखी जा रही है। अगर आपको एक ऐसा आहार चाहिए जिसमें अलग अलग प्रकार के पोषक तत्वों की पूर्ति की जा सके तो अपने अनाज में परिवर्तन लाइए। हमेशा एक तरह का अनाज उपयोग न करते हुए प्रतिदिन अलग अलग प्रकार का अनाज का सेवन करें। जिसमें हम गेहूं के साथ चना के आटा का इस्तेमाल कर सकते हैं।चना एक ताकतवर अनाज हैं। यह प्रोटीन ,फाइबर, विटामिन्स से भरपूर है।यह पाचन क्रिया को मजबूत भी बनाता है।
इसके अलावा बाजरे की रोटी को भी अपने भोजन की थाली में शामिल जरूर करना चाहिए लेकिन इसका सेवन रोज नहीं करना चाहिए इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए यह शरीर की गर्मी को बड़ा सकता है।यह भी प्रोटीन कैल्शियम जिंक से भरपूर होती है।
इसके बाद आप मक्के की रोटी का भी सेवन करें। यह फाइबर प्रोटीन को लेने का अच्छा विकल्प है।अध्ययन में पाया गया है कि यह वजन कम करने में सहायक है। 

दाल

दाल,अनाज में ही शामिल होती हैं।लेकिन आहार शेली में इसे अलग ही दर्जा प्राप्त है। दाल प्रोटींस से भरपूर होती हैं।अगर आप शारीरिक कमज़ोरी से जूझ रहे हैं या जिम जाकर बॉडी बनाते हैं तो प्रोटीन की पूर्ति के लिए दाल एक अच्छा विकल्प है। दालों में छिलके वाली दाल का सेवन अधिक करें।जिससे फाइबर  भी मिलता है। कुछ दालों की तासीर गरम होती है तथा यह एक कठोर अनाज है इसीलिए इनका सेवन करने से पूर्व एक रात्रि पूर्व पानी में भिगो कर रख दे। तथा अगले दिन इन्हें किसी खुले बर्तन में उबाले तथा कूकर का इस्तेमाल करने से बचें। अगर हम इसे पीतल या मिट्टी के बर्तन में उबालकर पकाते हैं।तो इसके हमें अधिक से अधिक पोषक तत्व मिलते हैं (कूकर की अपेक्षा) तथा यह दाल अधिक स्वादिष्ट भी लगती है। दालों में चना,मूंग, उड़द,तुअर आदि का उपयोग कर सकते हैं। 

फाइबर

भोजन में उन अनाजों को जरूर शामिल करें जिनमें फाइबर की मात्रा अधिक हो।अगर फाइबर की मात्रा अधिक हो तो यह भोजन पचाने को आसान बनाता है तथा शरीर में गुलुकोस का स्तर तुरन्त नहीं बढ़ता है जिससे हम डाइबिटीज के होने से बचे रहते हैं। डाइबिटीज के होने का कारण शरीर में गुलुकोज की मात्रा का बढ़ना  ही है। इसीलिए भोजन में मिलेट्स,मक्का का इस्तेमाल बढ़ाए ।

तेल

कभी भी रिफाइंड तेल का इस्तेमाल ना करें। यह एक धीमे जहर की तरह है। तेल वही अच्छा जिसमें चिकनाहट हो अगर तेल को रिफाइंड कर उसमें से चिकनाहट निकाल ले तो तेल अपने सारे गुणधर्म खो देता है। जब कोई अपनी विशेषता खो चुका तो वह फायदा तो नहीं पहुंचा सकता है इसीलिए हमेशा शुद्ध तेल का सेवन करना चाहिए। तथा तेल को भी बदल बदल कर इस्तेमाल करेंगें तो यह और भी उत्तम है। तेलों में हम सरसों,राइसब्रेन ,ऑलिव ऑयल,कोकोनट ऑयल ,तिल का तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सब्जी-फल

अकसर देखा जाता है कि हम एक ही प्रकार की सब्जी को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं आलू।वेशक यह अच्छी सब्जी है लेकिन रोजाना इसका ही सेवन उचित है।इसके अलावा अन्य सब्जियों का उपयोग भी अति आवश्यक है। हमारे घरों में सबसे ज्यादा ना पसंद कि जाने वाली सब्जी शायद लौकी ही होगी लेकिन लौकी की अनेक विशेषताएं हैं। तथा हर अन्य सब्जी की अपनी अपनी अलग अलग विशेषताएं हैं। इसीलिए रोज बदल बदल कर सब्जी खाने से हमारे शरीर को अलग अलग प्रकार के पोषक तत्व मिलते रहेंगे जो हमें स्वास्थ्य रखने तथा हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं।इसके साथ मौसमी सब्जियों व मौसमी फलों का सेवन अवश्य करें। फल फाइबर,विटामिन्स,मिनिरल्स के अच्छे सोर्स होते हैं। जैसा कि हम जानते है कि विटामिन्स की कमी से कितने प्रकार के रोग हो सकते हैं।जैसे अगर हमारे शरीर में विटामिन ए की कमी हो जाए तो हमें आंखो का रोग हो सकता है।और गाजर विटामिन ए का एक अच्छा सोर्स है। ऐसे ही अन्य हर प्रकार का फल या सब्जी किसी ना किसी पोषक तत्व से पूर्ण है। इसीलिए सबका सेवन करते रखना चाहिए।।

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-Naman Jain


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