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cervical pain (गर्दन का दर्द) - causes, symptoms, treatment.



आज की हमारी जीवन शैली,रहन सहन इस प्रकार का हो गया है कि जो रोग, शारीरिक पीड़ाएं एक उम्र के बाद होते थे वो अब जीवन की किसी भी अवस्था में होने लगे हैं।उनमें से एक है बीमारी है सरवाइकल पैन (गर्दन का दर्द)।
आज के समय में एक आम जिन्दगी इतनी अस्त -व्यस्त हो चुकी है कि उसे अपने शरीर पर ध्यान देने तक का समय नहीं है। हम शारीरिक व्यायाम से  दूर हो चुके है जिस कारण कई बीमारियों को हम अपने शरीर में रहने का न्यौता दे देते हैं। यही वजह है कि आज के समय लोगों को रीढ की हड्डी से सम्बन्धित बीमारियां बढ़ती जा रही है।सरवाइकल पैन,शुरुआत में गर्दन के दर्द या अकड़न के साथ शुरू होता है या गर्दन के आस पास के हिस्से में दर्द रहने लगता है। अगर यह अधिक समय तक रहे तो यह सर्वाइकल  में बदल जाता है।
समय रहते देखभाल व पूर्ण इलाज लिया जाए तो इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है। अगर शुरुआती समय में ध्यान ना दिया जाए तो समय के इसका दर्द इतना बड़ जाता है कि वो असहनीय बन जाता है।तथा  जिसके बाद सामान्य इलाज से ठीक होना मुश्किल हो जाता है।जिसके चलते कई बार ऑपरेशन तक कराना पड़ सकता है।

सरवाइकल पैन के प्रकार

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइसिस सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस

दोनों ही स्थिति में लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं।

लक्षण

•शुरुआती लक्षण में गर्दन में दर्द व अकड़न महसूस होना।
•गर्दन झुकने व हिलाने में दर्द होना।
•चक्कर व उल्टी आना।
•सिर के पीछे,कंधे ,बाह में दर्द होना।
•गर्दन में खिंचाव।
•सुबह जागने के बाद गर्दन में अकड़ापन।

सर्वाइकल के कारण

•भारी बोझ उठाना।
•हड्डियों का कमजोर होना।
•सिर झुकाकर काम करना।
•मोबाइल,लैपटॉप का लंबे समय तक लगातार उपयोग।
•लगातार काम करना।
•गर्दन पर कोई चोट का लगना।

सर्वाइकल से कैसे सुरक्षित रहे।

•गर्दन का सही पोस्चर रखना बहुत जरूरी है।
•कोशिश करें कि पीठ व गर्दन को सीधा करके बेठे।
•सोते समय अधिक ऊंचे तकिए का इस्तेमाल करने से बचें।
•गर्दन व कन्धों पर भरी चीजों का भार देने से बचे अगर सरवाइकल के लक्षण दिखाई दे रहे है।
•नियमित गर्दन व रीढ की हड्डी का व्यायाम करें।जिससे हड्डियों में  लचीला पन रहे जो झटका लगने पर या भार उठाने पर अंदरूनी चोट से बचाता भी है।
•लगातार लंबे समय तक काम ना करें,बीच में ब्रेक भी ले।
• कम्प्यूटर,मोबाइल,टीवी का इस्तेमाल करते समय लंबे समय तक एक ही अवस्था में ना बैठे।


क्या ना करें।

•गर्दन के एक तरफ दर्द होने पर उस तरफ हो कर ना लेटे।
•गर्दन में दर्द होने पर झाड़ फूंक से दर्द को दूर करने से बचें।
•उन व्यक्तियों से मालिश ना कराए जिनको मालिश करने का पूरा ज्ञान ना हो।
•गर्दन की एक्सरसाइज में लापरवाही न बरतें।
 

आहार शैली में परिवर्तन 

सर्वाइकल पैन होने में कैल्शियम,मिनिरल्स की कमी होना भी एक कारण देखा गया।जिसके चलते हड्डियों पर दुष्प्रभाव पड़ता है।इसके लिए हमें एक संतुलित आहार लेने की आवश्यकता है। जिसमें हरी सब्जियां,ताजा फल, दूध के होना आवश्यक है।आज के समय शरीर में कैल्शियम की कमी होना एक आम बात देखी गई है कैल्शियम की कमी से अनेक रोग हमें घेर सकते हैं इसको दूर करने के लिए आयुर्वेद में सबसे अच्छा व सस्ता उपाय है चुने का सेवन।चुने का  सेवन सुबह पानी में डाल कर या दोपहर में दही के साथ ले सकते हैं।लेकिन ध्यान रहे कि इसकी मात्रा एक गेंहू के दाने के जितना ही करना चाहिए।

सर्वाइकल का उपचार।

•गर्दन का व्यायाम करना ।
•गर्म थैली से दर्द से ग्रसित स्थान की मालिश करना।
•आसान जो सर्वाइकल पैन को करने में मदद कर सकते हैं। जैसे -भुजंगासन, नौकासन,धनुशासन ।
•नियमित फिजियोथैरिपी लेना।
•सर्वाइकल कॉलर का इस्तेमाल करना।
•अधिक दर्द होने पर दर्द नाशक गोली का सेवन भी करें।

जीवन में खान पान में बदलाव कर,व्यायाम को जीवन का हिस्सा बना कर,असंगत आदतें छोड़ कर ,रोज व्यायाम कर मसल को मजबूत कर हम सर्वाइकल पैन को हरा सकते हैं।

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-Naman Jain

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